बड़े बुजुर्ग सच कह गये कि
किसी का भला कर
फिर किसी को सुनाना नहीं।
भलाई का व्यापार
शायद पहले भी इसी तरह
चलता रहा होगा,
करते होंगे कम
लोग सुनाते होंगे अपने किस्से ज्यादा,
बिकता होगा पहले भी
बाज़ार में इसी तरह भलाई का वादा,
कौन मानेगा कि
बिना मतलब किसी का काम किया होगा,
पर इंसान तो गल्तियों का पुतला है
कभी कभी हो जाये भला काम
फिर उसे कभी अकेले में भी गुनगनाना नहीं,
लिख देना समय के हिसाब में
मिला इनाम तो ठीक
पर अपना खुद भुनाना नहीं।
-----------------
संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://deepkraj.blogspot.com
-------------------------
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
समसामयिक लेख तथा अध्यात्म चर्चा के लिए नई पत्रिका -दीपक भारतदीप,ग्वालियर
Showing posts with label समाज-सेवा. Show all posts
Showing posts with label समाज-सेवा. Show all posts
Subscribe to:
Posts (Atom)
-
--- ज़माने पर सवाल पर सवालसभी उठाते, अपने बारे में कोई पूछे झूठे जवाब जुटाते। ‘दीपकबापू’ झांक रहे सभी दूसरे के घरों में, गैर के दर्द पर अपन...
-
जमीन पर लहु बिखरा पड़ा है फिर भी उनका बयान किन्तु और परंतु शब्दों के साथ खड़ा है। मरने वालों पर बोले वह कुछ शब्द पर कातिलों का दर्द भी बया...
-
तुम तय करो पहले अपनी जिन्दगी में चाहते क्या हो फिर सोचो किस्से और कैसे चाहते क्या हो उजालों में ही जीना चाहते हो तो पहले चिराग जलाना सीख...