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Jun 22, 2008

सापेक्ष मंत्र ही है जीवन का आधार-हिन्दी शायरी


जब दिल में हो अकेले होने को
होता है अहसास
तब बुरे ख्याल आ ही जाते हैं
जब भीड़ में
हो जाते अकेले ही अनायास
तब नापसंद लोग भी
सामने चले आते हैं
हम चाहकर भी सोच नहीं बदल पाते
न आंखे हटा पाते हैं
अपने मन में अंतद्र्वन्द्वों के
जाल में स्वयं ही फंसकर छटपटाते हैं

बुरे ख्याल छोड़ना हो
या नापसंद आदमी से मूंह फेरने की
कोशिश करने से से अच्छा है
किसी अच्छे ख्याल की तरफ चले जायें
किसी पसंद के शख्स को पास बुलायें
उपेक्षा कोई मंत्र नहीं है जो
उबार सके अंतद्र्वंद्वों से
सापेक्ष मंत्र ही है जीवन का आधार
मन जिनमें नही रमता
उनसे दूर हटकर भी कहां जीवन जमता
ऐसे में कोई नया कर दिखायें
बदल दें अपनी दिशायें
जिंदगी में अमन रखना है तो
किसी से दूर रहने के लिये
किसी के पास चले जाते हैं
हम तो इसी सापेक्ष मंत्र से
जीवन के दर्द का इलाज करते जाते हैं
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दीपक भारतदीप

Mar 10, 2008

समन्दर गहरा कि मन-हिन्दी शायरी

समन्दर गहरा है कि मन
कोई नहीं जान पाया
जिसने जैसा समझा बताया
दोनों पर इंसान काबू नहीं कर सकता
पर फिर भी इसका उपाय बताया

समन्दर में मीठे पानी की तलाश में
आदमी का मन ललचाया
जहाँ मिलता है मीठा पानी
वहाँ से उसका मन कभी नहीं भर पाया

चारों तरफ रौशनी में बैठा शख्स
अंधेरों में रहने वालों का दर्द बयान कर
लूटता हैं वाह-वाही
पर गली में जाने से उसका मन डरता है
उसके बडे होने के अहसास में
कोई सच उनके सामने कह नहीं पाया
अनजाने खौफ में जीता आदमी का मन
समन्दर की लहरों की तरह उठा और गिरता है
हम उसे नहीं चलाते
हमारी जीवन की नैया का मांझी है मन
भला इस सच को कौन जान पाया

अँधेरे में जिनके घर डूबे हैं
वह फिर भी जिन्दगी से नहीं ऊबे हैं
क्योंकि उम्मीद हैं उनको किसी दिन
रौशनी उनके घर में आयेगी
पर जो पी रहे हैं धरती और आकाश की रौशनी
जीते हैं एक डर में
पता नहीं कब अँधेरा उनके निकट आ जाये
इसके लिए उन्होने षड्यंत्रों को
अपना कवच बनाया
जिन्होंने लांघी मजबूरी की हद
वही जीते हैं जिन्दगी को सहजता से
समन्दर गहरा कि मन
उन्होने ही जान पाया
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Jun 29, 2007

याद आते हैं शराब के नशे में गुजरे पल

राहुल ने उसके लिए पूछा था-''आंटी, अंकल की आँखें हमेशा लाल क्यों रहती हैं? क्या वह शराब पीते हैं?

आंटी ने कहा-हाँ, बहुत पीते हैं। बेटा तुम ही उन्हें समझाओ न!

राहुल ने कहा-'आंटी, मैं उन्हें कैसे समझा सकता हूँ? वह तो मुझसे बडे हैं उन्हें खुद ही समझना चाहिए। उल्टे हम पीयें तो वह हमें समझायें।"

वह आकर अपने पति से लड़ने लगी-"देखो पड़ोस का बच्चा भी तुम्हें शराबी के तरह देखता है, कितने शर्म की बात है? हम लोगों को क्या समझाएं

वह चुपचाप सुनता रहा। उसने पीना नहीं छोडा। रोज शाम को काम से आने के बाद उसका पीना शुरू हो जाता था । बरसों तक वह दौर चला, परिवार और रिश्तेदारों में भी वह बदनाम हो गया था। एक बार राहुल ने उससे कहा था-" अंकल दिन-ब-दिन आपका चेहरा काला पड़ता जा रहा है । क्या आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, किसी डाक्टर को दिखाईये न !

वह उसका मंतव्य समझ गया, पर फिर भी अपने नशे से उसे इतना प्यार था कि वह हर बात को बेशर्मी से टाल जाता था।

मगर आज वह ऐसा नहीं था। आज राहुल ने उसे वायरलेस इयर फोन देते हुए कहा-"अंकल, लीजिये यह इयर फोन मैं आपके लिए लाया हूँ । अभी तक ईमेल के जरिये ही संपर्क रखते हैं , कितनी बार आपको चैट के लिए ट्राई किया पर आप लाईन पर होते है और अपने लिखने में इतना व्यस्त रहते हैं कि ध्यान ही नहीं देते। अब मैं यह आपके कंप्यूटर में लगा कर जा रहा हूँ , और आप और आंटी मुझसे बात करियेगा। में आपका लिखा इन्टरनेट पर पढता हूँ और चाहता हूँ कि आपसे बात भी करता रहूँ।"

फिर वह आंटी से बोला-"क्या बात है अंकल एकदम बदल गये हैं, कंप्यूटर पर लिखने लगे हैं , और चेहरा तो पहले से कहीं ज्यादा खिलने लगा है । मैं तो अंकल को देखकर हैरान रह गया।

वह बोलीं-"अब तुम्हारे अंकल ने शराब छोड़ दीं है और योग साधना और ध्यान में मस्त रहते हैं , और फिर आजकल यह इण्टरनेट पर लिखने लगे हैं और पीना तो भूल ही गये हैं। काम से वापस आते ही लिखने बैठ जाते हैं।

" हाँ, मैंने इनके लिखे लेखों को देखकर समझ लिया था, इतना लिखते हैं तो पीने के लिए समय ही कहॉ मिलता होगा। "राहुल खुश होकर अंकल की तरफ देखते हुए बोला।

उसने राहुल से वायरलेस इयर फोन हाथ में लिया और मैं उसे देख रहा था, मुझे याद आते हैं वह पल क्योंकि वह मैंने ही जिए थे। मैं खुद हैरान था और सोच रहा था 'क्या वाकई वह मैं ही था।'