Jul 29, 2012

रौशनी और सनसनी-हिन्दी शायरी (roshni aur sansani-hindi poem or shayari)

रौशनी का चिराग रखा
अंधेरी गली में
मुसाफिरों को रास्ता दिखाने के लिये
किसी ने तारीफ नहीं की
लगाई आग जिन्होंने सड़क पर
मशहूर हो गये,
सनसनी फैलायी जिन्होंने
लोगों के जज़्बातों का कत्ल कर
कभी चमक रहे पर्दे पर
कभी मंच पर चढ़ रहे हैं,
दर्द बांटते रहे
सहलाते रहे जख्म
पूरे ज़माने का
भीड़ में कहीं इसलिये खो गये।
कहें दीपक बापू
दुनियां मे जुल्म करने वाले
कसूरवार नहीं है,
आदी हो गये हैं जमाने के लोग
मर मरकर जीने के
फिर सजा देने वाले
फरिश्ते भी अब उनके हमदर्द हो गये।
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...