किसी भाव भी किसी का दिल मिल जाए.
प्यार वह शय है
जो हर बाज़ार में बिकती है
मगर खरीद फरोख्त
मुफ्त में होती दिखती है
चेहरे पर भले नकली चमक हो
जेब में भले ही छोटे सिक्कों की खनक हो
किसी को नीयत और असलियत की न भनक हो
जाल बिछाकर बैठो
भटके दिमाग और खाली दिल
शिकार की तरह चले आयेंगे
अपना प्यार लुटाएंगे मुफ्त में
भले ही फिर उनका मज़ाक बन जाए.
तुम तो ठहरे शिकारी
भला कौन तुम्हें
प्यार के शिकार का दर्द समझाए.
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