Aug 3, 2016

नारों पर पका रहे खाना-हिन्दी कविता(Naron par Paka rahe Khana-Hindi kavita

देख था उनका चेहरा
लगा कि वह
चमका देंगे ज़माना।

उनके बोल सुनकर लगा
जिंदगी में हो जायेगा
आसान सांस पाना।

कहें दीपकबापू नारों पर
पका रहे सभी का खाना
बांट रहे कल्याण का दाना
उनके फैलाये यकीन के
जाल में कभी दिल न फसाना।
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जवानी भी नशे में चूर होती-दीपकबापूवाणी (Jawani Bhi nashe mein chooh hotee=DeepakBapuwani)

जवानी भी नशे में चूर होती किस्मत है कि जोश में भटके नहीं। ‘दीपकबापू’ साथ ईमान नाम भी खो देते वह भले जो इश्क में अटके नहीं। --- ...