Jun 16, 2016

चैतन्य का साझीदार-हिन्दी व्यंग्य कविता (Chaitnya ka Sajhidar-Hindi Satire poem)


नशे में जिंदगी
ढूंढने वालों पर
तरस आता है।

मस्त रहते
मानो मदहोशी में
स्वर्ग बरस जाता है।

कहें दीपकबापू दिल के दर्द से
छूटकारा दिला सके
ऐसी दवा बनी नहीं
चैतन्य का साझीदार
अंदर ही रस पाता है।
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Jun 2, 2016

संतोष में धन छिपा है-हिन्दी कविता(Santosh mein Dhan Chhipa hai-Hindi Kavita)

उपाधियों का बाज़ार
लगा सभी तरफ
खरीद कर सजा लो।

अयोग्य लोगों की भीड़
कोई सवाल नहीं करेगी
स्वयं अपनी तारीफ बजा लो।

कहें दीपकबापू संतोष में
सबसे बड़ा धन छिपा है
जमा कर लो अपने पास
फिर मायापथ पर भागते
धावकों का मजा लो।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...