Jun 16, 2016

चैतन्य का साझीदार-हिन्दी व्यंग्य कविता (Chaitnya ka Sajhidar-Hindi Satire poem)


नशे में जिंदगी
ढूंढने वालों पर
तरस आता है।

मस्त रहते
मानो मदहोशी में
स्वर्ग बरस जाता है।

कहें दीपकबापू दिल के दर्द से
छूटकारा दिला सके
ऐसी दवा बनी नहीं
चैतन्य का साझीदार
अंदर ही रस पाता है।
--------------
Post a Comment

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...