Jan 19, 2016

भीड़ नारों पर मरती है-हिन्दी कविता(Bhid naron par marti hai-Hindi Kavita)

जीवन संघर्ष में
विजय पर भीड़
शंखनाद करती है।

अभियान में शामिल
भीड़ लक्ष्य व साधन पर
वाद प्रतिवाद करती है।

कहें दीपकबापू हृदय की बात
सभी जगह बताई नहीं जाती
सभी मान लें जस की त
यह प्रवृत्ति पाई नहीं जाती
इंसानों की भीड़
मगर टुकड़ों में बंटी बुद्धि
नारों पर ही मरती है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Jan 1, 2016

प्रायोजित दृश्य-हिन्दी कविता(Spontsord Scene-Hindi Kavita)

पर्दे पर पटकथा से
अभिनय करते नायक
असली नहीं हुआ करते।

सांपसीढ़ी के खिलाड़ी
कागजी संघर्ष में व्यस्त
जीतहार के फैसले
असली नहीं हुआ करते।

कहें दीपकबापू मौन होकर
देखते सभी दृश्य
न कभी हंसना न रोना
प्रायोजित स्वांग
असली नहीं हुआ करे।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...