Aug 23, 2014

संसार के सूत्र--हिन्दी कविता(sansar ke sootra-hindi kavita)



मनुष्यों के बीच युद्ध न होते
तब कोई शांति के लिये
नारे नहीं लिख पाता।

प्राण खोने के डर से
मनुष्य नहीं रखता अस्त्र शस्त्र
तब कोई वीर नहीं दिख पाता।

धनवानों ने श्रमिकों का
खून नहीं चूसा होता
तब कोई कल्याण का देवता
दान के दर पर  नहीं टिक पाता।

कहें दीपक बापू संसार के सूत्र
कुछ प्रकृति ने बनाये,
कुछ व्यापार ने सजाये,
अमल करने के दाम नहीं मिलते
तब कोई चतुर प्रबंधक बिक नहीं पाता।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Aug 16, 2014

ठेकेदारों ने तय किये नैतिकता के पैमाने-हिन्दी व्यंग्य कविता(thekedaron ne tay kiye naitikta ke paimane)



धर्म की पहचान
अलग अलग रंग के
कपड़े और टोपी हो गयी है।

ठेकेदारों ने तय किये हैं
नैतिकता और आदर्श के पैमाने
आम इंसान की अक्ल
उनको नापने में खो गयी है।

जो हर काम में हारे हैं
वही धर्म के सहारे हैं
विदेशी आयातित नारे लगाते हुए
देशी भक्ति सो गयी है।

कहें दीपक बापू सहज राह
चलने की आदत नहीं रही
किसी समाज में
ठेकेदार दिखाते धर्म का मार्ग
रंगीन तस्वीरों में खोए लोग के लिये
ज्ञान की किताबों गूढ़ हो गयी हैं।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
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Aug 9, 2014

कल्याण का काम ठेके पर-हिन्दी कविता(kalyan ka kam bheke par-hindi poem)




इंसानों की आदत है
अपनी नाकामी का बोझ
दूसरों पर डालते हैं।

अपनी जेब को भरने के लिये सभी तैयार
परमार्थ का काम
परमात्मा पर टालते हैं।

विलासिता का आनंद
कभी कष्टमय होता है
फिर भी लोग
अपने मन में पालते हैं।

कहें दीपक बापू कल्याण का काम
ठेके पर होने लगा है,
दाम चुकाओ तो ठीक
वरना वफा के नाम पर
हर जगह मिलता दगा है,
मजबूरों की मेहनत के दम पर
सभी ताकतवर अपने घर
सोने के सामानों ढालते हैं।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...