जाने-पहचाने सफर पर तो
रोज चलते हैं
पर कभी अनजाने सफर पर
चलकर भी देखा है
जान-पहचान के लोगों से
मिलकर तो रोज
कभी जानी हुई बात करते हैं
पर क्या कभी अनजान लोगों से
अपने को अनजानी बाते करते देखा
रोज वही चेहरे और वही स्वर
मन को नहीं लुभा सकते
चाहे कितने दिल और देह के करीब हों
कभी अपने मन को
अनजानों में एक अनजान की तरह
घूमने के लिए तरसते देखा है
जाने-पहचाने लोगों की महफ़िल में
भला कहाँ प्यार मिल पाता है
कभी अनजान चेहरों में
तुमने हमदर्दी का भाव देखा है
दुनिया उससे बहुत बड़ी है
जितनी तुम देखते हो
इस छोर से उस छोर तक
बहुत कुछ है देखने लायक
पर क्या तुमने उसको अपने से
दूर तक देखने का ख्वाब देखा है
समसामयिक लेख तथा अध्यात्म चर्चा के लिए नई पत्रिका -दीपक भारतदीप,ग्वालियर
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Feb 1, 2008
Jan 24, 2008
अपने आसरे चलना सीख नहीं पाते-कविता साहित्य
कितनी बार टूटता भरोसा
फिर भी हम किये जाते
क्योंकि अपने लिए इसके
अलावा कोई रास्ते नहीं बन पाते
अपने नसीबों पर करते हैं
हमेशा भरोसे की बात
पर दिल से खौफ इंसानों का निकाले नहीं पाते
खडे होते एक जगह
पर भटकता मन कहीं दूर
कोई तो बन जाये हमारा हुजुर
अपने इरादों पर चलने से घबडाते
अपना भरोसा दिखाकर
कितने ढहाते सितम-दर-सितम
पर हम खामोशी से सह जाते
सिलसिला चलता है बरसों तक
फिर भी अपने आसरे चलना सीख नहीं पाते
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फिर भी हम किये जाते
क्योंकि अपने लिए इसके
अलावा कोई रास्ते नहीं बन पाते
अपने नसीबों पर करते हैं
हमेशा भरोसे की बात
पर दिल से खौफ इंसानों का निकाले नहीं पाते
खडे होते एक जगह
पर भटकता मन कहीं दूर
कोई तो बन जाये हमारा हुजुर
अपने इरादों पर चलने से घबडाते
अपना भरोसा दिखाकर
कितने ढहाते सितम-दर-सितम
पर हम खामोशी से सह जाते
सिलसिला चलता है बरसों तक
फिर भी अपने आसरे चलना सीख नहीं पाते
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Jan 23, 2008
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है-कविता साहित्य
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है
ख़्वाबों को हमेशा टूटे देख
सपनों को बिखरते देख
कब तक और किससे लड़ें
खामोश हो जाना अच्छा लगता है
जमीन और आकाश के बीच
जिन्दगी जब थकती सी लगे
अपनों से दूरी बढ़ने लगे
कुछ पाकर भी दिल होता बेचैन
अपने दर्द से भीग जाएं अपने नैन
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है
कायदों के करें हमेशा अपनी बात
वही फायदे के लिए मारते लात
कभी गुस्सा तो कभी बेचैनी से
भर जाता है मन
बिना आग के ही जलता मन
तब खामोशी ओढ़ना लगता ठीक
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है
ख़्वाबों को हमेशा टूटे देख
सपनों को बिखरते देख
कब तक और किससे लड़ें
खामोश हो जाना अच्छा लगता है
जमीन और आकाश के बीच
जिन्दगी जब थकती सी लगे
अपनों से दूरी बढ़ने लगे
कुछ पाकर भी दिल होता बेचैन
अपने दर्द से भीग जाएं अपने नैन
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है
कायदों के करें हमेशा अपनी बात
वही फायदे के लिए मारते लात
कभी गुस्सा तो कभी बेचैनी से
भर जाता है मन
बिना आग के ही जलता मन
तब खामोशी ओढ़ना लगता ठीक
उदास हो जाना कभी अच्छा लगता है
Jan 22, 2008
अनजाने लोगों के बीच ढूँढें सच्चा प्यार-कविता साहित्य
जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार
पर मिलती है सब जगह से दुत्कार
खुद करो चाहे किसी से भी तुम
मांगो न किसी से इसका उपहार
लोग नहीं निकल पाते अपने दिल से
खरीदा और बिकता पैसे से यहाँ प्यार
भाषा में बहुत होते हैं सुन्दर शब्द
पर बोलने में सब लोग हैं लाचार
अपनों में कितना भी तलाशो नहीं मिलता
गैरों भी नहीं मिल सकता जल्दी प्यार
शब्द में होती ढेर सारी शक्ति
पर पैसे से ही लोग देते-लेते प्यार
बेहतर है निकल पड़े अनजाने सफर पर
शायद कहीं मिल जाये प्यार
अपनों की भीड़ में रहकर ऊबने से अच्छा है
अनजाने लोगों के बीच ढूँढें सच्चा प्यार
पर मिलती है सब जगह से दुत्कार
खुद करो चाहे किसी से भी तुम
मांगो न किसी से इसका उपहार
लोग नहीं निकल पाते अपने दिल से
खरीदा और बिकता पैसे से यहाँ प्यार
भाषा में बहुत होते हैं सुन्दर शब्द
पर बोलने में सब लोग हैं लाचार
अपनों में कितना भी तलाशो नहीं मिलता
गैरों भी नहीं मिल सकता जल्दी प्यार
शब्द में होती ढेर सारी शक्ति
पर पैसे से ही लोग देते-लेते प्यार
बेहतर है निकल पड़े अनजाने सफर पर
शायद कहीं मिल जाये प्यार
अपनों की भीड़ में रहकर ऊबने से अच्छा है
अनजाने लोगों के बीच ढूँढें सच्चा प्यार
Jan 21, 2008
चैन से जिन्दगी की जंग लड़ने भी नहीं देते- कविता साहित्य
हमारे लिए जिनके मन में दर्द है
उनका प्यार हमें डरा देता है
सोचते हैं कि हम ही झेलें अपनी पीडा
किसी दूसरे को क्यों सताएं
हमारे लिए कोई और तडपे
यह ख्याल ही दर्द बढा देता है
समय गुजरता जायेगा
अपने इरादों को हम पहुंचा देंगे
यही सबको बताते
पर लोग हैं कि यकीन नहीं करते
हमें पसीना बहते देख
अपनी आंखों में पानी लाते
अक्ल के अंधे
बेरहम जमाने से लड़ते देख
पल-पल घबडा जाते
हम सोचते हैं कि वह क्यों नहीं होते दूर
चैन से हमें अपने जिन्दगी की जंग
कभी लड़ने क्यों नहीं देते
अपनी जिन्दगी से
पर कह नहीं पाते
फिर ख्याल आता है
जिन्दगी की जंग की हार-जीत से
बहुत बड़ी है हमदर्दी और प्यार
जो हम अपने चाहने वालों से पाते हैं
यही ख्याल हमें अपने से दूर हटा देता है
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उनका प्यार हमें डरा देता है
सोचते हैं कि हम ही झेलें अपनी पीडा
किसी दूसरे को क्यों सताएं
हमारे लिए कोई और तडपे
यह ख्याल ही दर्द बढा देता है
समय गुजरता जायेगा
अपने इरादों को हम पहुंचा देंगे
यही सबको बताते
पर लोग हैं कि यकीन नहीं करते
हमें पसीना बहते देख
अपनी आंखों में पानी लाते
अक्ल के अंधे
बेरहम जमाने से लड़ते देख
पल-पल घबडा जाते
हम सोचते हैं कि वह क्यों नहीं होते दूर
चैन से हमें अपने जिन्दगी की जंग
कभी लड़ने क्यों नहीं देते
अपनी जिन्दगी से
पर कह नहीं पाते
फिर ख्याल आता है
जिन्दगी की जंग की हार-जीत से
बहुत बड़ी है हमदर्दी और प्यार
जो हम अपने चाहने वालों से पाते हैं
यही ख्याल हमें अपने से दूर हटा देता है
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Jan 16, 2008
इतिहास के खंभे खडे हैं उनके नाम-कविता
याचना करने से भीख मिलती हैं
वाचना करने से इनाम
जिन्दगी एक खेल है
चलती है अपनी राह अपनी अदा से
आदमी लिखना चाहता उस पर नाम
जहाँ खामोशी होना चाहिए
वहाँ जोर से चिल्लाता है
जहाँ करना चाहिए आवाज
वहाँ डर कर बंद कर लेता आँख
अनेक दुश्मन मान लेता अनाम
ख्वाहिशें पूरी होने के अनुमान से
चक्कर काटता है नकली मोहब्बत की गलियों में
सोचता है शायद कहीं हो जाये
उसके दिल के पूरे अरमान
रखा जिन्होंने अपने पर भरोसा
जिन्दगी में वही छोड़ते हैं
दूसरों को सीखने के लिए
अपने पैरों के निशान
याचना और वाचना करने वाले
अपने घर भर सकते हैं
दुनिया भर के साजो-सम्मान
जो वक्त के साथ उनके घर का
कबाड़ भी बन जाता है
सस्ते में खो देते हैं स्वाभिमान
जिन्होंने जिया अपनी जिन्दगी को
अपने तरीके से
अपना सम्मान सजाया है दिल में
ईमान के साथ सलीके से
नहीं जुटाया कोई अपने बैठने के लिए फर्नीचर
कई इतिहास के खंभे खडे हैं
लिखा है जिन पर उनका नाम
वाचना करने से इनाम
जिन्दगी एक खेल है
चलती है अपनी राह अपनी अदा से
आदमी लिखना चाहता उस पर नाम
जहाँ खामोशी होना चाहिए
वहाँ जोर से चिल्लाता है
जहाँ करना चाहिए आवाज
वहाँ डर कर बंद कर लेता आँख
अनेक दुश्मन मान लेता अनाम
ख्वाहिशें पूरी होने के अनुमान से
चक्कर काटता है नकली मोहब्बत की गलियों में
सोचता है शायद कहीं हो जाये
उसके दिल के पूरे अरमान
रखा जिन्होंने अपने पर भरोसा
जिन्दगी में वही छोड़ते हैं
दूसरों को सीखने के लिए
अपने पैरों के निशान
याचना और वाचना करने वाले
अपने घर भर सकते हैं
दुनिया भर के साजो-सम्मान
जो वक्त के साथ उनके घर का
कबाड़ भी बन जाता है
सस्ते में खो देते हैं स्वाभिमान
जिन्होंने जिया अपनी जिन्दगी को
अपने तरीके से
अपना सम्मान सजाया है दिल में
ईमान के साथ सलीके से
नहीं जुटाया कोई अपने बैठने के लिए फर्नीचर
कई इतिहास के खंभे खडे हैं
लिखा है जिन पर उनका नाम
Nov 30, 2007
पर कब तक
उनकी यादों को अपने दिल में रखें
पर कब तक
उनके वादों के पूरा होने पर भरोसा करें
पर कब तक
उनके बारे में
अपने इरादों को जाहिर नहीं करें
पर कब तक
उम्मीद हो कोई तो
इन्तजार करे और भी
पर क्या फायदा बहारों का मौसम आने का
बिखर जाये हमारा आसरा तब तक
उनके दिल में हमारे लिए
भी प्यार की आग जलेगी
यह विश्वास कर लेते
चिंगारी भी दिख रही होती जब तक
पर कब तक
उनके वादों के पूरा होने पर भरोसा करें
पर कब तक
उनके बारे में
अपने इरादों को जाहिर नहीं करें
पर कब तक
उम्मीद हो कोई तो
इन्तजार करे और भी
पर क्या फायदा बहारों का मौसम आने का
बिखर जाये हमारा आसरा तब तक
उनके दिल में हमारे लिए
भी प्यार की आग जलेगी
यह विश्वास कर लेते
चिंगारी भी दिख रही होती जब तक
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तुम तय करो पहले अपनी जिन्दगी में चाहते क्या हो फिर सोचो किस्से और कैसे चाहते क्या हो उजालों में ही जीना चाहते हो तो पहले चिराग जलाना सीख...