Feb 22, 2016

हमदर्दों की दुकान-हिन्दी कविता (Hamdardon Ki Dukan-Hindi Kavita)

सभी पर करते
शब्द से प्रहार
स्वयं सहते नहीं।

वाणी में शब्द का अभाव
दूसरों का मुख लेते उधार
स्वयं कहते नहीं।

कहें दीपकबापू मत करना
पेशेवर हमदर्दों पर विश्वास
जहां धंधा हो मंदा
बदलते दुकान
जिसमे स्वयं रहते नहीं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Feb 6, 2016

बेपरवाह-हिन्दी कविता(Berparvah-HIndi kavita)

जिंदगी के हर पल मेंशामिल है कोई पैगामअक्लमंद ही पढ़ पाते।
हर कदम बनाता इतिहाससमझने वाले हीबढ़ पाते।
कहें दीपकबापू हिसाब सेचलने वाले बेपहरवाहतरक्की की ऊंचाई परवही चढ़ पाते।---------

कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...