Feb 6, 2016

बेपरवाह-हिन्दी कविता(Berparvah-HIndi kavita)

जिंदगी के हर पल मेंशामिल है कोई पैगामअक्लमंद ही पढ़ पाते।
हर कदम बनाता इतिहाससमझने वाले हीबढ़ पाते।
कहें दीपकबापू हिसाब सेचलने वाले बेपहरवाहतरक्की की ऊंचाई परवही चढ़ पाते।---------

कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...