Dec 30, 2014

इंसान की भी नसल होती है-हिन्दी कविता(insan ki bhi nasal hotee hain-hindi poem)



इंसानी समाज में भी

तरह तरह की नसल होती है।



मन सबसे बड़ा खिलाड़ी

हर पल जागते हुए

बोता है विचारों के बीच

उनसे भी अलग अलग

फसल होती है।



कहें दीपक बापू संसार पर

चतुर लोग धर्म की छतरी के नीचे

आम इंसानों की भीड़ लगाकर

उनकी नकली पहचान बनाते रहे,

अच्छे अच्छ शब्द कहकर

सर्वशक्तिमान की तरह

पांव पुजवाते रहे,

फिर भी नहीं रूकते द्वंद्व

आकाश से कोई फरिश्ता

नहीं आता लेकर शांति संदेश

यह धरती ही इंसान का

तय करती जीवन

उसकी रचना ही असल होती है।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Dec 24, 2014

राजस्वी और तपस्वी-हिन्दी कविता(rajsvi aur tapasvi-hindi poem)



धनस्वी कभी मनस्वी नहीं होते
आत्मविज्ञापन से
यशस्वी जरूरी हो जाते हैं।

राजपद पर तपस्वी
कभी नहीं विराजते
मिलता है जिनको सिंहासन
आत्मविज्ञापन से
तपस्वी जरूर हो जाते हैं।

कहें दीपक बापू पीड़ा से
कवितायें बनती हैं,
प्रगति के वादे होते
पर दवा नहीं बनती हैं,
ज़माने का दर्द के व्यापार में
लगे लोग हो जाते राजस्वी
आत्म विज्ञापन में
तपस्वी  जरूर हो जाते हैं
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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Dec 17, 2014

पेशावर की घटना से पाक की रीति नीति में बदलाव की आशा व्यर्थ-हिन्दी चिंत्तन लेख(peshawar ki ghatana se pakistan ki reeti neeti mein badalav ki aasha vyarth-hindi thought article)



            पाकिस्तान के एक सैन्य विद्यालय में आतंकवादियों ने 131 बच्चों सहित 141 बच्चों को मार दिया। विश्व की दर्दनाक घटनाओं में यह एक है और हमारे भारत देश की दृष्टि से यह आज से दस वर्ष पूर्व मुंबई में घटित हिंसक घटना के बाद दूसरे नंबर की है।  हम पाकिस्तान से ज्यादा आतंकवादी हिंसक घटनायें झेल चुके हैं।  यह सभी घटनायें पाकिस्तान से प्रायोजित होती हैं।  भारत ही नहीं पूरा विश्व पाकिस्तान से निर्यात किये जाने वाले आतंकवाद का दर्द झेल रहा है।  हम अगर इस घटना का आंकलन उस तरह की अपराधिक घटनाओं से करें जिसमें अपराधी बम बनाकर बेचते हैं पर उसे बनाते हुए कभी कभी उनके घर में ही विस्फोट हो जाता है।  इसके बावजूद वह बम बनाना और बेचना बंद नहीं करते।
            इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह घटना बहुत पीड़ादायक है पर इससे पाकिस्तान की नीति में सुधार की आशा करना बेकार है क्योंकि वह जिस राह पर चला है उसमें भारत के प्रति सद्भावना का मार्ग उसके लिये निषिद्ध है।  अनेक लोग इस घटना  धर्म से जोड़कर यह दावा कर रहे हैं कि कोई भी धर्म इस तरह के हमले की प्रेरणा नहीं देता। इस घटना में धर्म से कोई संबंध नहीं है क्योंकि यहां पाकिस्तानी सेना से नाराज आतंकवादी गुट ने उसे सबक सिखाने के लिये यह हमला करने का दावा किया है।  पाकिस्तान में कोई आतंकवादी घटना धर्म से संबद्ध नहीं होती वरन् वहां के अंातरिक समुदायों का अनवरत संघर्ष इसका एक बड़ा कारण होता है।  यह संघर्ष जातीय, क्षेत्रीय और भाषाई विवादों से उत्पन्न होता है। पाकिस्तान का हम कागज पर जो क्षेत्रफल देखते हैं उसमें सिंध, ब्लूचिस्तान और सीमा प्रांत के साथ पंजाब भी शामिल है पर धरातल पर पंजाबी जाति, भाषा तथा क्षेत्र का सम्राज्य फैला है।  पंजाब को छोड़कर बाकी तीनों प्रांतों के लोेग हर तरह से उपेक्षित हैं जबकि सत्य यह है कि पंजाबी लोगों ने उनका शोषण कर संपन्नता अर्जित की है।
            पाकिस्तान की वास्तविकता केवल लाहौर तथा इस्लामाबाद तक सिमटी है।  इसलिये पेशावर या कराची में होने वाली घटनाओं से वहां किसी प्रकार का भावनात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।  पाकिस्तान के सभ्रांत वर्ग में पंजाबियों को ऊंचा स्थान प्राप्त है।  जिस सैन्य विद्यालय में यह कांड हुआ है वहां आतंकवादियों ने सेन्य अधिकारियों के बच्चों को छांटकर मारा है।  यह बुरी बात है इससे हम सहमत नहीं है पर इसमें एक संदेह है कि वहां सेना में उच्च पदों पर पंजाबी अधिक हैं उससे कहीं अन्य जाति या भाषाई गिरोहोें ने बदले की कार्यवाही से तो यह नहीं किया? पाकिस्तान पंजाब के सक्रिय भारत विरोधी आतंकवादियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करता।  उसे वह मित्र लगते हैं मगर जिस तरह उसने आतंकवाद को प्रश्रय दिया है वह दूसरे इलाकों में उसके विरुद्ध फैल रहा है।
            भारतीय प्रचार माध्यमों में अनेक विद्वान यह अपेक्षा कर रहे हैं कि पाकिस्तान इससे सुधर जायेगा तो वह गलती पर हैं। उन्हें यह बात सोचना भी नहीं चाहिये।  यह बात सच है कि पाकिस्तान की सिंधी, पंजाबी, ब्लूची तथा पश्तो भाषाी जनता में भारत के प्रति अधिक विरोध नहीं है पर वहां के उर्दू भाषी शासकों के लिये यही एक आधार है जिसके आधार पर उन्हें सहधर्मी राष्ट्रों से राज्य संचालन के लिये गुप्त सहायता मिल पाती है।  वैसे भी वहां के भारत विरोधी इस घटना में अपनी भड़ास परंपरागत ढंग से निकाल रहे हैं। दो चार दिन के विलाप के बाद फिर उनका प्रभाव वहां दिखाई देगा। पेशावर की यह घटना लाहौर और इस्लामाबाद पर अधिक देर तक भावनात्मक प्रभाव डालकर उसकी रीति नीति में बदलाव की प्रेरणा नहीं बन सकती।     इस घटना में मारे गये बच्चों के प्रति सहानुभूति में कहने के लिये शब्द नहीं मिल रहे हैं। किसी भी दृष्टिकोण से हम अपने हृदय को समझा नहीं पा रहे कि आखिर इस दुःख को झेलने वाली माओं का दर्द कैसे लिखा जाये? फिर भी हम उन बच्चों को श्रद्धांजलि देते हुए भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके परिवार को यह दुःख झेलने की शक्ति दे।

 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Dec 11, 2014

धर्म कर्म के नाम पर-हिन्दी कविता(dharma karma ke naam par hindi poem)



मनुष्यों के हृदय
खिलौने की तरह टूट जायें
भावनाओं के व्यापारी
कोई हिसाब नहीं रखते।

जहां लाभ का अवसर आये
वहीं लगाते अपने चक्षु
स्वयं धन की चाहत में
दृश्य का स्वाद नहीं चखते।

कहें दीपक बापू अपने वश में
नहीं है पूरा ज़माना,
धर्म और कर्म के नाम पर
केवल जानते हैं लोग कमाना,
विषयों के विशेषज्ञ सभी
उनके मस्तिष्क में प्रज्जवलित
वैचारिक अग्नि पर
मानवीय भाव नहीं पकते।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Dec 3, 2014

कहानियों का प्रायोजन-हिन्दी कविता(kahanyon ka prayojan-hindi poem)



प्रचार के भूखे सब
दिल बहलाने के लिये
नायक और खलनायक
मिलकर लड़ते हैं।

किसी के नाम
किसी के बदनाम होने से
बन जाती कहानियां
कभी कभी प्रायोजक
पैसा खर्च कर गढ़ते हैं।

कहें दीपक बापू मनोरंजन से
कमाते हैं चालाक व्यापारी
समझदार लेते मुफ्त में
हवा और पानी के मजे
मूर्खो की दरियादिली से
दूसरों के खजाने बढ़ते हैं।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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Nov 25, 2014

योग करो तो जानो-लघु हिन्दी चिंत्तन लेख(yog kara to jano-hindi thought article)



                       प्रातःकाल समाचार सुनना अच्छा है या भजन! एक जिज्ञासु ने यह प्रश्न किया।
            इसका जवाब यह है कि समाचार सुनने पर हृदय में प्रसन्नता, आशा, तथा सद्भाव उत्पन्न होने की  संभावना के साथ ही हिंसा, निराशा, तनाव तथा क्रोध का भाव आने की आशंका भी रहती है।  भजन से मन में राग उत्पन्न अच्छा रहता है पर जब वह बंद हो जायेगा तो क्लेश भी होगा।  योग सूत्र के अनुसार राग में व्यवधान के बाद क्लेश उत्पन्न ही होता है।
            प्रातःकाल सबसे अच्छा यही है कि समस्त इंद्रियों को मौन रखकर ध्यान किया जाये।  यही मौन सारी देह में नयी ऊर्जा का संचार करता है। यही ऊर्जा पूरे दिन देह में स्फूर्ति बनी रहती है। पढ़ने या सुनने से यह बात समझ में नहीं आयेगी। करो तो जानो।
            एक योग साधक सुबह उद्यान में अपने नित्य क्रम में व्यस्त था। उसके पास एक अन्य व्यक्ति आया और बोला-‘‘यार, इस तरह क्या हाथ पांव चला रहे हो। हमारे साथ घूमो तो देह को अधिक लाभ मिलेगा।
            साधक हंसकर चुप रहा। वह फिर बोला-‘‘इस तरह की साधना से कोई लाभ नहीं होता। चिकित्सक कहते हैं कि पैदल घूमने से ही बीमारी दूर रहती है। तुम हमारे साथ घूमो! दोनो बाते करेंगे तो भारी आनंद मिलेगा।
            साधक ने कहा-‘‘पर वह तो मुझे अभी भी मिल रहा है।
            ‘‘तुम नहीं सुधरोगे’’-ऐसा कहकर चला गया।
            कुछ देर बार वह घूमकर लौटा और पास बैठ गया और बोला-‘‘अभी भी तुम योग साधना कर रहे हो। मैं तो थक गया! तुम थके नहीं!’’
            साधक ने कहा-‘‘तुम दूसरों के साथ बात करते अपनी ऊर्जा क्षरण कर रहे थे और मेरी देह मौन होकर उसका संचय कर रही थी। थक तो मैं तब जाऊंगा जब बोलना शुरू करूंगा।’’
            वह व्यक्ति व्यथित होकर उठ खड़ा हुआ-‘‘यार तुमसे तो बात करना ही बेकार है। तुम्हारे इस मौन से क्रोध आता है। इसलिये मैं तो चला।’’
            मौन केवल वाणी का ही नहीं कान, आंख और मस्तिष्क में भी रहना चाहिये।  यही योग है।  मौन रहका प्राणों के आयाम पर ध्यान रखने की क्रिया को जो आनंद है वह करने वाले ही जानते हैं।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Nov 14, 2014

इंसान में फर्क-हिन्दी कविता(insan mein fark-hindi poem)



जीवन चक्र में कोई
अपनी योजना पर
होता बहुत सफल
कोई फंस जाता है।
जिसके हिस्से आया
भाग्य का खूबसूरत हिस्सा
भूल जाता है अपना दर्द
दूसरे पर रोज हंस जाता है।
कहें दीपक बापू सभी इंसान
लगते हैं एक जैसे
मगर दिल और दिमाग का
फर्क होता ही है,
कोई सोता है आंखें बंदकर
कोई जागते ही सोता है,
एक राह पर चलकर
कोई पहुंच जाता सिंहासन तक
दूसरा उसी पर गड्ढे में धंस जाता है।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Nov 5, 2014

राजपद की महिमा-हिन्दी कविता(rajpad ki mahima-hindi poem)



यह संभव नहीं है
राजपद पर पहुंचकर
किसी के हृदय में आये
विशिष्टता का अहंकार।

महल के बाहर
लगती भीड़
आशायें लेकर आते लोग,
ज़माने के साथ चला आता
शिकायतों का रोग,
आंख और कान होते भं्रमित
सुनकर अपनी ही
प्रशस्ति गान की झंकार।

कहें दीपक बापू चल रहे
सभी सर्वशक्तिमान का नाम लेकर,
जिंदगी जी रहे
पसीने की कीमत देकर,
सिंहासन की तरफ निहारते
कोई तो आयेगा कभी
उनके उद्धार के लिये
करेगा धनुष की टंकार,
अपने पराये के भेद से
परे होकर रहेगा निरंकार।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Oct 29, 2014

स्वामी बन रहा सेवक-हिन्दी कविता(swami ban raha sewsk-hindi poem)



निर्धन की सेवा
कोई धर्म बताकर
हृदय के  बड़े चाव से
सेवका की भूमिका निभा रहा है।

कोई आधुनिक समय की
आवश्यक परंपरा मानकर
चंदे का ग्राहक 
प्रचार के लिये स्वयं  सेवक की
भूमिका  निभा रहा है।

कहें दीपक बापू सर्वशक्तिमान से
कैसी रची यह माया,
कभी खुश नहीं रही
इसका पीछा करती
मनुष्य की काया,
भाग्य लिख दिये
सभी के अलग अलग
जिसकी जेब खाली
वह दाल रोटी खाकर भी
भजन में मग्न रहता
उसकी चिंता के व्यापार मे
स्वामी दिखाने के लिये
सेवक की भूमिका निभा रहा है।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

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Oct 24, 2014

दीपावली और अंधेरे के साये-हिन्दी कविता(deepawali aur andhere ke saye-hindi poem)



दीपावली की रात को
जले दीये
सुबह बुझे खड़े थे।

उनके तले  चारों तरफ
अंधेरे साये प्रातःकाल तक
डेरा डाले अड़े थे।

कहें दीपक बापू रंग बदलती दुनियां में
जहां ऊंचाई है,
वहीं खाई है,
जहां आनंद मिलने के संकेत हैं,
वही खड़े स्वार्थ के खेत हैं,
उत्थान के चलते हैं दौर,
पतन पर भी करते लोग गौर,
खुशी की रात जले पटाखे
चमके मस्ती के बादल
सुबह सूरज की सलामी के लिये
जमीन पर गंदगी के ढेर भी खड़े थे।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...