Dec 3, 2014

कहानियों का प्रायोजन-हिन्दी कविता(kahanyon ka prayojan-hindi poem)



प्रचार के भूखे सब
दिल बहलाने के लिये
नायक और खलनायक
मिलकर लड़ते हैं।

किसी के नाम
किसी के बदनाम होने से
बन जाती कहानियां
कभी कभी प्रायोजक
पैसा खर्च कर गढ़ते हैं।

कहें दीपक बापू मनोरंजन से
कमाते हैं चालाक व्यापारी
समझदार लेते मुफ्त में
हवा और पानी के मजे
मूर्खो की दरियादिली से
दूसरों के खजाने बढ़ते हैं।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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खजाने का पहरेदार से हिसाब न पूछना-दीपकबापूवाणी (Khazane ka Hisab paharedar se na poochhna-DeepakBapuwani)

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