Apr 30, 2015

इष्ट और दुष्ट की मदद-हिन्दी कविता(isht aur dusht ki madad-hindi poem

)
दान की बछिया के
दांत नहीं देखे जाते
यह कहा जाता है।

ताकतवर इंसान बेबस की
मजाक बनाते हैं
यह सहा जाता है।

कहें दीपक बापू विपत्ति पर
मित्र पहचाना जाता है,
मददगार के वेश में दिखता
वह भी जिसे शत्रु जाना जाता है,
इष्ट भेजते अमृत
जीवन बचाने के लिये
दुष्टों से भी बिना विष भेजे
नहीं रहा जाता है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Apr 24, 2015

जिंदगी का सच और मीठा सपना-हिन्दी कविता(zindagi ka sach aur meetha sapana-hindi poem)

हैरान है हम
यहां बाज़ार में
रोज एक नया सपना
बिक जाता है।

कमअक्ल की क्या कहें
अक्लमंद का ख्याल  भी
सपने पर टिक जाता है।

कहें दीपक बापू जिंदगी का सच
इतना कड़वा है कि
पीते पीत लोग
ऊब जाते हैं
इसलिये मीठा सपना भी
उनके होठों पर कुछ पल
मुस्कराहट लिख जाता है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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Apr 16, 2015

कोई नज़र नहीं आता-हिन्दी कविता(koyee nazar nahin aata-hindi poem)

प्रश्न बहुत हैं
उत्तर की तलाश करता
कोई नज़र नहीं आता।

समस्याऐं बहुत हैं
उनका हल करता
कोई नज़र नहीं आता।

कहें दीपक उपभोक्ता सभी है
बाज़ार में भी सजे सामान
खरीददारों की पंक्ति में
पहचान का गुण रखते
कोई नज़र नहीं आता।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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Apr 4, 2015

इंसान और शेर-हिन्दी कविता(insan aur sher-hindi kavita, men and lion-hindi poem)

डरना नहीं
यह प्रतिमा की तरह खड़े
पत्थर के शेर हैं।

नहीं चढ़ सकते
सिंहासन की सीढ़ी
जहां पहले से ही विराजमान
कागज के शेर हैं।

कहें दीपक बापू स्मृतियों में
रह जायेगा जंगल का राजा,
सिंह गर्जना करेगा संगीत का बाज़ा,
शिकारी फिर भी चिंतित नहीं
उसके वार के लिये
मौजूद हैं ढेर सारे मासूम इंसान
जो बातों के शेर है।
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 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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आओ खूबसूरत चरित्रों की फिक्र करें-दीपकबापूवाणी (Aao Khubsurat charitron ki Fikra kahen-DeepakBapuwani)

जिससे डरे वही तन्हाई साथ चली , प्रेंमरहित मिली दिल की हर गली। ‘ दीपकबापू ’ हम तो चिंगारी लाते रहे अंधेरापसंदों को नह...