Apr 24, 2015

जिंदगी का सच और मीठा सपना-हिन्दी कविता(zindagi ka sach aur meetha sapana-hindi poem)

हैरान है हम
यहां बाज़ार में
रोज एक नया सपना
बिक जाता है।

कमअक्ल की क्या कहें
अक्लमंद का ख्याल  भी
सपने पर टिक जाता है।

कहें दीपक बापू जिंदगी का सच
इतना कड़वा है कि
पीते पीत लोग
ऊब जाते हैं
इसलिये मीठा सपना भी
उनके होठों पर कुछ पल
मुस्कराहट लिख जाता है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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