Apr 16, 2015

कोई नज़र नहीं आता-हिन्दी कविता(koyee nazar nahin aata-hindi poem)

प्रश्न बहुत हैं
उत्तर की तलाश करता
कोई नज़र नहीं आता।

समस्याऐं बहुत हैं
उनका हल करता
कोई नज़र नहीं आता।

कहें दीपक उपभोक्ता सभी है
बाज़ार में भी सजे सामान
खरीददारों की पंक्ति में
पहचान का गुण रखते
कोई नज़र नहीं आता।
---------------------------

कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जवानी भी नशे में चूर होती-दीपकबापूवाणी (Jawani Bhi nashe mein chooh hotee=DeepakBapuwani)

जवानी भी नशे में चूर होती किस्मत है कि जोश में भटके नहीं। ‘दीपकबापू’ साथ ईमान नाम भी खो देते वह भले जो इश्क में अटके नहीं। --- ...