Mar 3, 2016

मलाई के लिये पग-हिन्दी कविता(Malai ke Liye pag-Hindi Kavita)


भाषा से चुन लेते शब्द
फिर ज्ञानी वाक्युद्ध में
लग जाते हैं।

वैसे तो सोये रहते हम
जब इतना शोर हो
तब जग जाते हैं।

कहें दीपकबापू खुश रहो
भलाई का ठेका लेने वालों
तुम चंदे खाते से 
भरते रहो
भले ही मदद की बजाय
मलाई खाने के लिये
तुम्हारे पग आते हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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