Mar 1, 2009

दवाईयों की सेल का पता नहीं बताया-हास्य व्यंग्य कविता

‘सेल में जाकर खरीदने का शौक
एक बहुत बड़ा मनोरोग है’
डाक्टर ने महिला को बताया
दवाईयों का पर्चा भी हाथ में थमाया

बिना दवा लिये महिला घर लौटी
पति के पूछने पर बताया
‘डाक्टर भी कैसा अनपढ़ और अनगढ़ था
भला एक दिन में भी कोई
बीमारी दूर होती है
मैंने रास्ते भर छान मारा
दवाईयों की दुकानें तो बहुत थीं
पर सेल का बोर्ड कहीं नजर नहीं आया
आप ही जाकर पता करना
सेल में दवायें कहां मिलती हैं
तो खुद ही ले आऊंगी
आप दुकान से ले आये या सेल से
यकीन नहीं कर पाऊंगी
उसके यहां भीड़ बहुत थी
पर सेल कहीं नहीं लिखा था
अधिक मरीजों को कारण
उसकी अस्पताल का माहौल वैसा ही दिखा था
बीमारी देखी और दवाई लिख दी
पर दवाईयों की सेल का पता नहीं बताया

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