Dec 31, 2011

नव वर्ष और नये दिन पर हिन्दी साहित्यक कविता (hindi literature poem or kavita on new year and new day, naya varsha aur naya din)

 वह बोले
"दीपक बापू
नव वर्ष की बधाई,
उम्मीद है इस साल आप सफल हास्य कवि  हो जाओगे,
फिर हमें जरूर दारू पिलाओगे।"
दीपक बापू बोले
"आपको भी बधाई
पर हम ज़रा गणित में कमजोर हैं,
भले ही शब्दों के  सिरमोर हैं,
यह कौनसा साल शुरू हुआ है
आप हमें बताओगे।"
वह तिलमिला उठे और
यह कहकर चल दिये
"मालूम होता तो
नहीं देते तुम्हें हम बधाई,
तुमने अपनी हास्य कविता वाली
जुबान हम पर ही  आजमाई,
वह तो हम जल्दी में हैं
इसलिए नए साल का नंबर याद नहीं आ रहा
फुर्सत में आकर तुम्हें बता देंगे
तब तुम शर्माओगे।"

दिन बीतता है
देखते देखते सप्ताह भी
चला जाता है
महीने निकलते हुए
वर्ष भी बीत जाता है,
नया दिन
नया सप्ताह
नया माह
और नया वर्ष
क्या ताजगी दे सकते हैं
बिना हृदय की अनुभूतियों के
शायद नहीं!
रौशनी में देखने ख्वाब का शौक
सुंदर जिस्म छूने की चाहत
शराब में जीभ को नहलाते हुए
सुख पाने की कोशिश
खोखला बना देती है इंसानी दिमाग को
मौज में थककर चूर होते लोग
क्या सच में दिल बहला पाते हैं
शायद नहीं!
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है।
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