Jan 20, 2014

अच्छा है चिल्लाने का बहाना-हिन्दी व्यंग्य(achchha hai chillane ka bahana-hindi vyangya)



नित नये स्वांग रचें,
अपने ही सच से आप बचें,
जिंदगी में हर पल एक नया शगूफा छोड़कर
सरल है स्वयं को  बहलाना
मौका मिले तो दूसरे को भी बरगलाना।
कहें दीपक बापू
पर्दे पर चलती खबर
फिल्म की तरह बनी लगती हैं,
पात्रों की अदायें बाद में हुई 
पहले लिखी लगती है,
जब काम न बनता हो अपने आप से
अस्त्र शस्त्रों को पास में दबाकर
भीड़ में हमदर्दी पाने के लिये
अच्छा है चिल्लाने का बहानां
......................................

 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...