May 12, 2015

प्रकृति के कत्ल का दंड-हिन्दी कविता(prakriti ke katla ka danm-hindi poem)


प्रतिदिन भूकंप से
धरती माता को
हिलना ही है।

भौतिक विकास के
सज रहे कांटों पर
नैतिक विनाश का गुलाब
खिलना ही है।

कहें दीपक बापू प्रकृति का कत्ल
कोई  भी करे
धरती पर हर इंसान को
दंड मिलना ही हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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