May 26, 2015

विज्ञापन के गिद्ध-हिन्दी कविता(vigyapan ke giddha-hindi poem)


आतंक के लिये
कुछ इंसान
बहुत प्रसिद्ध हो जाते हैं।

प्रचार के बाज़ार में
विज्ञापनों के बीच
समाचार प्रसारण के लिये
उनके नाम सिद्ध हो जाते हैं।

कहें दीपक बापू भौतिक युग में
नाम भी बिकता है,
बदनाम भी नायक दिखता है,
कसूरवार मर भी जाये,
ज़माना उसे जिंदा ही पाये,
हजारों के कातिल पर फिदा
 विज्ञापन के गिद्ध हो जाते हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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