Nov 17, 2015

बौद्धिक विलास-हिन्दी शायरी(bauddhik wilas-Hindi Shayari)

आकाश से फैंके बम
खिलौने की तरह
इंसान तोड़ देते हैं।

सजाते हैं महफिल
अमन के नाम पर
चाय का धुंआ छोड़ देते हैं।

कहें दीपकबापू सिंहासनों पर
विराजे लोग नहीं करते
कभी बौद्धिक विलास
कारिंदों के मस्तिष्क से
अपने कदम जोड़ देते हैं।
------------
कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जवानी भी नशे में चूर होती-दीपकबापूवाणी (Jawani Bhi nashe mein chooh hotee=DeepakBapuwani)

जवानी भी नशे में चूर होती किस्मत है कि जोश में भटके नहीं। ‘दीपकबापू’ साथ ईमान नाम भी खो देते वह भले जो इश्क में अटके नहीं। --- ...