Jul 6, 2017

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर
उन्होंने अपनी आस खोई है।
अपने ही पांव तले
तबाही वाली घास बोई है।
------
जेब में पैसा कम
पर सपने अमीरी से सजे हैं।
वातानुकूलित मॉल में
ग्राहक सोचता सामान
देखने में कितने मजे हैं।
---
समस्या खड़ी कर
हल का सवाल पूछने आते हैं।
पत्थर दिल के बुत
हवा से जूझने जाते हैं।
---
मन में बाज़ार से
खरीददारी की चाहत
पर जेब खाली है।
ज़माने ने जिंदगी
उधार पर ही टाली है।
--------
मिलती खुशी उधार से
चाहे जहां से हम मांग लेते।
नकद में सस्ता मिला चैन
इसलिये चाहतें यूं ही टांग देते।
---
बस्तियों में आग लगा देते हैं
अमन में जंग जगा देते हैं।
जज़्बात के सौदागर
इंसानों को दगा देते हैं।
--

Post a Comment

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...