Jan 1, 2016

प्रायोजित दृश्य-हिन्दी कविता(Spontsord Scene-Hindi Kavita)

पर्दे पर पटकथा से
अभिनय करते नायक
असली नहीं हुआ करते।

सांपसीढ़ी के खिलाड़ी
कागजी संघर्ष में व्यस्त
जीतहार के फैसले
असली नहीं हुआ करते।

कहें दीपकबापू मौन होकर
देखते सभी दृश्य
न कभी हंसना न रोना
प्रायोजित स्वांग
असली नहीं हुआ करे।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

Dec 24, 2015

देखने में मजा आता है-हिन्दी शायरी(Dekhne mein Maza aata hai-Hindi Shayari)

जहां रोटियों से पेट भरे
वहां भूख के दृश्य
देखने में मजा आता है।

जहां गरीबी हो
वहां अमीरों की एय्याशी
देखने में मजा आता है।

कहें दीपकबापू दिल पर
कितना शोध करें
माशुका पर आये तो
चेहरा सबसे सुंदर लगता
आशिक पर आये
सबसे ताकतवर लगता
खामोशी से घूमती दुनियां
देखने में मजा आता है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
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Dec 14, 2015

अहसास-हिन्दी कविता(Ahasas-Hindi Kavita)

नहीं जानते हम
धरती की आकाश से
कितनी दूरी है।

 सतत संघर्ष में चिंता यह
जीवंत आशा से
कितनी दूरी है।

कहें दीपकबापू ऊंचाई से
निहारते हुए
नीचे से ऊपर ताकते हुए
दृश्यों के बीच अहसास
जितनी दूरी है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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Dec 5, 2015

समविषम का संकट-हिन्दी हास्य कविता (Troble of Odd-Even -Hindi Satire poem)

पैदल चलकर भी खुश हैं
जिनके घर में
अभी तक कार नहीं आई।

पर्यावरण प्रदूषण से जूझते
अभियानों की धमक
उनके द्वार नहीं आई।

कहें दीपकबापू चलते चलते
टांग थक जाती है
फिर भी अब दर्द कम लगता है
समविषम के संकट से
बचने की मनुहार जो नहीं गायी।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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Nov 26, 2015

प्रायोजित पूजा-हिन्दी कविता(Prayojit Puja-Hindi Kavita)


 बड़बोले कभी
शब्दवीर नहीं होते।
मति में चिंत्तन से
अधिक चिंतायें पालते
वाणी में तीर नहीं होते।

कहें दीपकबापू दिल के सौदे में
सौदागर हुए मालामाल
तेज घावक बन गये
बिगड़ी थी जिनकी चाल
जूझते दाम के लिये
प्रायोजित पूजा करवाते
मगर वह पीर नहीं होते।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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Nov 17, 2015

बौद्धिक विलास-हिन्दी शायरी(bauddhik wilas-Hindi Shayari)

आकाश से फैंके बम
खिलौने की तरह
इंसान तोड़ देते हैं।

सजाते हैं महफिल
अमन के नाम पर
चाय का धुंआ छोड़ देते हैं।

कहें दीपकबापू सिंहासनों पर
विराजे लोग नहीं करते
कभी बौद्धिक विलास
कारिंदों के मस्तिष्क से
अपने कदम जोड़ देते हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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Nov 7, 2015

मन का खेल-हिन्दी कविता(Man ka Khel-Hindi Kavita)


विलासिता में जिंदगी
बिताने वाले
दर्द से जल्दी कराहते हैं।

नहीं देखे कभी जिन्होंने
नाकामी के दौर
पसीने को सराहते हैं।

कहें दीपकबापू मन का खेल है
महल में रहने वाले
सड़क पर सोते लोगों को
सुखी मानते
जमीन पर सोने वाले
बिस्तर पाने के लिये
पसीना बहाते हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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