Mar 20, 2015

प्रचार के सौदागर-हिन्दी कविता(prachar ke saudagar-hindi poem)



प्रचार के सौदागर
ज़माने पर लगे जख्म भी
सामान की तरह
सजा लेते हैं।

दिल के ग्राहक का
दिमाग जीतने के लिये
मातमी धुन भी बजा लेते हैं।

कहें दीपक बापू ताली बजाकर
जितवा देते हैं
जिंदगी की हर जंग,
भौंपू की आवाज से
सोच कर देते तंग,
कहीं कत्ल हो
कहीं हो जाये जश्न
अपनी तिजोरी भरने का
वही मजा लेते हैं।
---------------------

 कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...