Nov 3, 2007

पाकिस्तान में सरकार पुरानी, इमरजेंसी नयी

पाकिस्तान में फिर इमरजेंसी लगा दी गयी है। अगर देखा जाये तो हालत वैसे ही जैसे नवाज शरीफ के तख्ता पलट के समय थे, पर इस बार कोई तख्ता पलट नहीं है पर मुशर्रफ ने ऐसा माहौल बनाया गया जैसे कोई तख्ता पलट हो रहा हो। इसमें में कोई शक नहीं है की मुशर्रफ में ऐसी चालाकी हो यह कभी नहीं लगता पर उनके पीछे कोई बहुत चालाक खोपडी है जो उनका संचालन कर रही है। सामने कोई नहीं है पर मुशर्रफ ऐसे सिद्ध हैं कि दुनिया को भूत दिखा रहे हैं। हमने कई भूत भगाने वाले ओझा देखे हैं पर मुशर्रफ जैसा नहीं देखा। हमेशा गरजने वाला अमेरिका भी केवल दु:ख व्यक्त कर रहा है। पिछले आठ वर्ष से मुशर्रफ वहाँ राज्य कर रहे हैं पर हालत बिगड़ते रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में लड़ने निकले मुशर्रफ से किसी ने नहीं पूछा कि 'जनाब, यह आतंकवाद आया कहाँ से?' आठ वर्ष से जूझ रहे मुशर्रफ अब तक आतंकवाद पर काबू नहीं पा सके। अमेरिका ने जिस तरह पाकिस्तान में अपना उपनिवेश कायम कर रखा है वह अब उसे तकलीफ देह होने वाला है।

मुझे लगता है कि यह इमरजेंसी बहुत दूर तक जाने वाली है। जिसे पाकिस्तान कहा जाता है उसका राजनीतिक मानचित्र कुछ भी कहता हो पर उसका संविधान बलोचिस्तान और सीमा प्रांत के इलाकों में नाम भर को चलता है। अंग्रेजों ने इस देश पर डेढ़ सौ वर्ष राज्य किया पर फिर भी यह उनकी निजी जागीर नहीं था जो सिंध, बलूचिस्तान और सीमा प्रांत और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान के नाम पर लिख गए। पूर्वी बंगाल तो पाकिस्तान से अलग हो गया पर बाकी तीनों प्रांत भी अब इस रास्ते पर हैं। मैंने अंतर्जाल पर अंग्रेजी में कई पाकिस्तानी ब्लोग देखे हैं और मुझे उनको पढ़ने पर यह यकीन करना मुश्किल होता है कि क्या वह उनके ही हैं या कोई छद्म ब्लोग हैं। पाकिस्तान पर बहुत समय तक पंजाब से प्रभावित लोगों का राज्य रहा है। उनका नजरिया केवल पंजाब के हितों तक ही सीमित रहा है। वैसे पाकिस्तान में आपातकाल लगना कोई बड़ी बात नहीं है पर इस बार का संकट पाकिस्तान के अस्त्तित्व के लिए चुनौती बनने जा रहा है-और जो लोग सोच रहे हैं कि मुशर्रफ इसे बचा लेंगे वह गलती पर हैं।

वैसे पाकिस्तान एक राष्ट्र है इस बात की पोल तो कई बार खुल चुकी है पर नवाज शरीफ की हाल ही में पाकिस्तान वापसी के समय एक छोटे देश के राजदूत ने उन्हें समझौते के वह दस्तावेज दिखाए जो उन्होने अपनी रिहाई के लिए उसको गवाह बनाकर दस्तक किये थे-यह बात का खुला प्रमाण था कि पाकिस्तान में अन्य राष्ट्रों की कितनी चलती है। अभी तक हर संकट में पाकिस्तान की सेना मजबूत रहती थी पर इस बार वह वजीरिस्तान में ऐसी जंग में फंसी हुई है जहाँ से उसका निकलना अगले कई बरसों तक संभव नहीं है। यह ऐसे इलाके हैं जिन पर अंग्रेज भी कभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं कर पाए और लोग भी वह हैं जो आज कश्मीर का हिस्सा आज पाक के पास है वह इन्हीं कबाइलियों के वजह से है। इस बार पाकिस्तान की सेना उनसे लड़ रही है जो पाकिस्तान के लिए एक हथियार रहे हैं।
भारत तो सदियों से पाकिस्तान के क्षेत्रों से आने वाले संकटों का सामना करता रहा है और वह आने वाली इस उथल-पुथल से उपजे संकट को भी झेल लेगा पर विश्व के अन्य देशों को वहां से आतंकवाद निर्यात होने वाला संकट और भी बढ़ सकता है। पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न राष्ट्र है और कई लोगों को शक है कि वहाँ से परमाणु तकनीकी आतंकवादियों के हाथ लग सकती है। यह कोई साधारण बात नहीं है कि पाकिस्तान एक परमाणु राष्ट्र है उसकी अस्थिरता अब पूरे विश्व के लिए खतरा है। मुशर्रफ बहुत समय तक पूरे विश्व को धोखा नही दे सकते और फिर उन पर आतंकवाद को पनपाने का आरोप है और आज वह उससे संघर्ष जिस तरह कर रहे हैं लोग उनकी नीयत पर शक करते हैं। इसी आतंकवाद का भी उन्होने इस बार ऐसा भूत खडा किया और अपने को पूरे विश्व में स्वीकार्य दिखाने का जिस तरह प्रयास किया उससे तो यह सवाल यह उठता है कि आखिर वह दोस्त किसके हैं-अमेरिका के, आतंकवादियों के या अपनी कुर्सी के। बहरहाल अगर सब कुछ पटरी पर नहीं आया तो पूरा विश्व इस घटनाक्रम प्रभावित होगा।
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