Sep 19, 2015

चेतना कब लायेंगे हम-हिन्दी कविता(Chetna kab layenge ham-hidi poem)

पुरानी कहानियों से
 कब तक सीखेंगे
फिर सिखायेंगे हम।
धरती पर इतिहास की
धारा अनवरत प्रवाहित
नई कहानियां के दान से
कब तक कतरायेंगे हम।

कहें दीपकबापू जड़ समाज पर
कब्जा रखने वाले
मरे भूत के भय का
दंड बनाकर बदलाव रोके हैं।
जिंदा लोगों में
चेतना कब लायेंगे हम।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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