Sep 12, 2015

साहित्य सौदा हो जाता है-हिन्दी दिवस पर कविता(sahitya sauda hog jata hai-Hindi Kavita on HindiDiwas)


मशहूर लेखक के
शब्द बाज़ार में
महंगे बिक जाते हैं।

चौराहे तक लेकर नहीं गये
अपने भारी भरकम शब्द
ऐसे लेखक अर्थ के बाज़ार में
कहां टिक पाते हैं।
 ‘कहें दीपक बापू बाज़ार के खेल से
साहित्य सौदा हो जाता है
मनोरंजन पहला मसौदा हो जाता है
सत्य से सजे  शब्द
वहां नहीं टिक पाते हैं।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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