Oct 30, 2015

मन के अभ्यास से-हिन्दी कविता(Man ke Abhyas se-Hindi Kavita)


दिमाग के भूत से
बचा सके इंसान को
बना कोई ताबीज नहीं है।

बिना श्रम के
सफलता की फसल उगाये
ऐसा कोई बीज नहीं है।

कहें दीपकबापू आत्मविश्वास से
जिंदगी का मार्ग सहज हो जाये
मन के अभ्यास से बुद्धि आये
वरना शिखर तक पहुंचाये
कोई ऐसी चीज नहीं है।
-----------
कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...