Jan 21, 2010

कुछ कम कर लो-हिन्दी शायरी (dost dushman-hindi shayri)

रोटी बहुत हैं तुम्हारे पास

तो भी अपने पेट की भूख

कुछ कम लो।

फैलाते हो पानी सड़क पर

बहुत बुरा है

कुछ अपनी प्यास ही कम कर लो।

चादर से बाहर पांव फैलाओ

दूसरे को आसरा मिले

इसलिये घर की छत कुछ कम लो।

ढेर सारे कपड़े सजाकर

घर में रखने से लाभ नहीं

पहनावे का शौक कुछ कम कर लो।

बांटकर खाना सीखो

अपनी अमीरी का रौब दिखाकर

दोस्त नहीं बनाये जाते

दूसरों का दर्द दूर करना सीखो

अपने दुश्मन जमाने में कुछ कम कर लो

लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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