Feb 14, 2010

पसीना है पवित्र नदी-हिन्दी शायरी (pasnina hai pavitra nadi-hindi shayri)

मेहनतकशों की किस्मत में

आरामदायक गद्दे इसलिये भी नहीं आते हैं,

उनके लिये रोगों का  होना जरूरी है

जो अमीरों के ही हिस्से में आते हैं।

तीर्थ में जाकर सर्वशक्तिमान के दर्शन कर

स्वर्ग मिल जाता,

पर वहां पवित्र सरोवरों में

स्नान कर भी

देह का कूड़ेदान साफ नहीं हो पाता,

जाने को पैसा नहीं है

फिर भी मजदूरों की देह से

बहते हुए अमृत रूप पसीने में

कई रोग बाहर बह जाते हैं।

पसीना है वह पवित्र नदी

जिसमें मेहनतकश की तैर पाते हैं।

लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

-------------------------------------
यह आलेख इस ब्लाग ‘राजलेख की हिंदी पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप
Post a Comment

जवानी भी नशे में चूर होती-दीपकबापूवाणी (Jawani Bhi nashe mein chooh hotee=DeepakBapuwani)

जवानी भी नशे में चूर होती किस्मत है कि जोश में भटके नहीं। ‘दीपकबापू’ साथ ईमान नाम भी खो देते वह भले जो इश्क में अटके नहीं। --- ...