Jul 13, 2015

अक्लमंदों का खेल-हिन्दी कविता(aklamandon ka khel-hindi poem)


अक्लमंदों को नहीं आता
समाज सुधारने का तरीका
वह नहीं खेद भी जताते।

जात भाषा और धर्म के
नाम पर उठाते मुद्दे
इंसानों में भेद बताते।

कहें दीपक बापू एकता के नाम
चला रहे अपना व्यापार
वही समाज में छेद कराते।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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