Jul 18, 2015

जिंदगी का सफर-हिन्दी कविता(zindagi ka safar-hindi poem)

स्मरण में नहीं  है
वह मित्र
जिंदगी के सफर में जो साथ थे।

भूल गये उनकी ताकत
हमारे सहारे जिनके हाथ थे।

कहें दीपक जिंदगी का रथ
चलता है इतनी तेजी से
आंखों के सामने गुजर जाते
बड़े बड़े पेड़
फसलों से भरे खेत
गगनचुंबी इमारतें
न हमने पूछा
न किसी ने बताया
कौन उनके नाथ थे।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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