Jul 2, 2015

शस्त्र और शब्द तीर-हिन्दी कविता(shastra aur shabda teer-hindi poem)


घर के अंदर
तलवार लहराने से
कोई वीर नहीं हो जाता।

सड़क पर नचाने से भी
कमजोर लोगों का
कोई पीर नहीं हो जाता।

कहें दीपक बापू सुई से
जहां सिलता कपड़ा
वहां लोहे के भाले से
काम नहीं होता
शस्त्र से अधिक शब्द तीर में
जोर तमाम होता
अलबत्ता अर्थहीन प्रहार से
कोई गंभीर नहीं हो जाता।
----------------
कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...