Jul 7, 2015

इंसानी आंखों का नजरिया-हिन्दी कविता(insani aankhon ka nazariya-hindi poem)

दुनियां में मतलबपरस्ती पर
क्यों हैरान होते हो
वही तो रिश्ते बनाती है।

नीयत सभी की एक जैसी
एक से काम निकला
दूसरा दोस्ती बनाती है।

कहें दीपक बापू फिर भी
जिंदगी रंगीन है,
इंसानी आंखों का नजरिया है
कभी भद्दी कभी हसीन है,
दिमागी सोच से ही
किसी के दिमाग में कंकर
किसी में हीरे खनखनाती है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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