Aug 20, 2015

संसार सागर में फंसी सभी की नाव-हिन्दी कविता(sansar sagar mein fansi sabhi ki naav hai-hindi poem)


जिंदगी की जंग में
हमारे शरीर पर भी
लगे बहुत सारे घाव हैं।

बस नहीं सजाते
कभी चौराहे पर जाकर
इसलिये उनके कम भाव हैं।

कहें दीपक बापू अपने दर्द के साथ
जीने की आदत डाली है
किससे उम्मीद करें
अपने संसार सागर के मझधार में
फंसी सभी की नाव है।
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कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
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