Aug 25, 2015

दो क्षणिकायें(two short poem)


रास्ते पर जरा संभलकर चला करो।
विकास के पहिये कभी
बहक भी जाते हैं, जरा डरा करो।
-----------
हिन्दी दिवस आ रहा है
हमें भुला देना।
 अंग्रेजी राईटर्स से स्पीच दिलाकर
लोगों को सुला देना
उनके सम्मान का खाता भी खुला देना।
------------
कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा 'भारतदीप'

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप",ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak "BharatDeep",Gwalior
http://rajlekh-patrika.blogspot.com
Post a Comment

जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से सजे हैं-हिन्दीक्षणिकायें (zeb mein paisa kam par sapne se saje hain-HindiShort poem}

हमारा विश्वास छीनकर उन्होंने अपनी आस खोई है। अपने ही पांव तले तबाही वाली घास बोई है। ------ जेब में पैसा कम पर सपने अमीरी से स...