Jan 13, 2008

अपने-अपने होते हैं अंदाज

यूं तो सपनों में भी वही आते हैं
जिन्हें हम देख पाते है
पर जागते हुए हम
कितना जागरूक रह पाते हैं
आसमान से जमीन पर आती हवाएं
जब सूरज की किरणें
फ़ैल जातीं है चारों ओर
पर इंसान उनके दृश्यों को कितना
अपनी आंखों में समेट पाते हैं
फिर भी अपने शक्तिशाली
और संपन्न होने का भ्रम
कितने लोग छोड़ पाते हैं

हवा तो छूकर निकल जाती है
सूरज की किरणे
चिपकी रहतीं है साथ पर
उनके स्पर्श की आत्मिक अनुभूति
कहाँ कर पाते हैं
जीवन में पल-पल पाने का मोह
हमें दूर कर देता है सुखद
और एकाकी पलों को
जीते कहाँ है
हम तो जिन्दगी को ढोते जाते हैं.
---------------------------------------------

अपने-अपने होते हैं अंदाज
सबके होते हैं कुछ न कुछ राज
पूरी जिन्दगी गुजर जाते हैं
कुछ बताने और कुछ छिपाने में
जान नहीं पाते अपनी जिन्दगी के राज
---------------------------------------------
Post a Comment

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर-दीपकबापूवाणी (man ke khet par dhan ka Chakkar-DeepakBapuwani)

मन के खेल पर भारी धन का चक्कर, वैभव रथ पर सवार देव से लेता टक्कर। ‘दीपकबापू’ आदर्श की बातें करते जरूर, रात के शैतान दिन में बनते फक्कड़।।...