Apr 2, 2007

कोच क्या पूरी कमेटी ही बुलवा लो, किसने रोका है?

देश के बुजर्ग क्रिकेट प्लेयर श्री डूंगरपुर साहब ने फतवा दिया है कि देश का कोइ क्रिकेटर भारतीय टीम का कोच बनने लायक नहीं है। उनका दवा है कि कोई विदेशी आदमी ही इस टीम का उद्धार कर सकता है। गाहे-बगाहे वह क्रिकेट के मामले में फतवे देते रहते हैं। उनको ज्यादा महत्व सामान्य आदमी भले ही भाव न दे पर मुम्बई में रहते हैं और क्रिकेट का मुख्यालय मुम्बई में ही है इसीलिये उनके कहे का प्रभाव होता है, भले वह हमें देखाई न दे।
वह किसी न किसी तरह क्रिकेट में अपना दखल देते ही हैं।
अब उनहोंने यह फतवा दिया है तो उसका परिणाम इस तरह सामने आएगा कि भारतीय क्रिकेट टीम वहीं रहेगी जहाँ है। पता नही भारतीय क्रिकेट में कुश लोग केवल इसीलिये दखल देते हैं कि उन्होने बल्ला हाथ में थामा था या एक दो दिन गें फेंकी थी। मुझे उनकी बात से बहुत तकलीफ पहुंची है। उन्होने तो कपिल के कोच होने पर सवालिया निशां लगा दिया है। यहां मैं उनको बता दूं कि जिस भारतीय क्रिकेट टीम ने १९८३ में वर्ल्ड चुप जीता था उसे न तो कोइ विदेशी कोच मिला था न फि उसे पास कोइ डाक्टर था फिर भी उसने विश्व कप जीता। इन २३ सालों में ऐसा क्या हो गया है कि हमें लगता है कि अब इस देश में न तो कोच पैदा हो रहा है न ही कोइ प्रतिभा है। वेंगसरकर को कोइ प्रतिभा ही नज़र नही आती इस देश में। मेरी एक सलाह है कि दोनों मिलकर जरा मुम्बई से बाहर आकर देखें देश में विदेशियों से ज्यादा लायक कोच मिल जायेंगे । अगर नहीं मिलते तो फिर कोच ही क्यों पूरी कि पूरी क्रिकेट कमेटी ही बहार से बुलावा लो । क्योंकि क्रिकेट अगर नहीं चली तो यहां कमेटियाँ ही जिम्मेदार हैं। और नहीं तो चयन कमेटी ही से बुलवा लो । आख़िर पूरे विश्व का क्रिकेट भारत के पेसे से चल रहा है तो क्या अपने देश का नहीं चलेगा । भारत में प्रतिभा की कमी है या यहां का कोइ आदमी कोचिंग लायक नही है जिन मूहों से कहा जा रहा ह उनमें भी भारत की रोटियां ही जाती हैं कोइ आस्ट्रेलिया वाले नहीं आते खिदमत करने। अपने देश की प्रतिभा का पूरा विश्व लोहा मान रहा है सिवा इन दोनों के। हम तो कह रहे कि कोच क्या क्रिकेट बोर्ड videsh से laao।
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