Apr 12, 2007

पाकिस्तान का नया पैंतरा:पानी के लिए जंग

पाकिस्तान के विदेश मंत्री कसूरी ने कहा है कि पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच युध्द हो सकता है। इसका सीधा मतलब यह है भारत चाहे कितनी भी कोशिश कर ले पकिस्तान के पास युध्द के बहानों की कमी नहीं रहेगी। उसे किसी मामले के सुलझने से मतलब नही है उसे बस हमेशा इस इलाक़े में तनाव बनाए रखना है। ऐसा लगता है कश्मीर मामले पर अपने देश में घटते जनसमर्थन से पाकिस्तान के रणनीतिकारों की नीद हराम हो गयी हैं और भारत की छबि वहां न बने और पाकिस्तान की जनता कहीं भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण न अपनाने लगे उनसे यह बयां दिलवाया गया है। पाकिस्तान का जन्म ही भारत से नफरत के आधार पर हुआ है- उसका अमेरिका ने लालन-पोषण भी केवल इसलिये किया ताकि भारत और चीन पर नियंत्रण रख सके। यह अलग बात है पाकिस्तान के नेताओं ने अमेरिका से धन लेकर अपने घर भरे और वहां की जनता को भारत विरोध और इस्लाम के नाम पर भूखा रखते रहे , और आज वहां दोनों मुद्दों की हवा निकल रही है तो वहां के शासक पाकिस्तान का असितत्व बचाने के लिए ऐसे बयां दे रहे हैं।
पकिस्तान जाने वाली नदियाँ भारत से गुजरती हैं और भारत ने अपने विकास के साथ अनेक नदियों पर बाँध बना लिए हैं। साथ ही यहां किसी से क्षेत्र के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है, पूरा विकास न हुआ हो पर किसी प्रदेश विशेष के प्रति केंद्र सरकार ने न तो लगाव दिखाया है और न ही उपेक्षा की है। यही कारन है कि इस देश में अलगाववादी आंदोलनों को कभी भारी जनसमर्थन नहीं मिलता । पाकिस्तान में देश का मतलब है पंजाब और पंजाब में भी लाहौर और रावलपिंडी तक ही उनका सोच है। पंजाब के बडे शहरो के लिए पेयजल और खेती के लिए पानी के इंतजाम के लिए सिंध और और बलूचिस्तान जाने वाले नदियों पर बाँध बना दिए हैं जिससे दोनों प्रदेशों में वर्ष भर अकाल रहता है। हिंदूओं के लिए पवित्र माने जाने वाली सिंध नदी में पानी का बहाव अब बहुत कम हो गया है, इसके अलावा सिंधी और ब्लूचियों के मन में पजाब के प्रति अधिक लगाव दिखाने के कारण बहुत रोष है। भारत के आतंकवादियों को पाकिस्तान ने इस्लामाबाद या लाहौर में न रखकर सिंध और बलूचिस्तान में शरण दीं जो आज वहां के लिए सिरदर्द बन गये हैं। दोनों प्रदेशों की जनता अब यह समझ गयी है कि पंजाब के हितों की खातिर उनको बलि का बकरा बनाया गया है-क्योंकि जब पाकिस्तान यह कहता है कि उसके यहां भी आतंकवाद है तो वह इन्ही प्रदेशों की तरफ इशारा करता है। इससे पंजाब को कोई परेशानी नहीं है। सारा संकट सिंध और बलूचिस्तान की जनता पर है। उसका अंदरूनी आतंकवाद भी इस तरह प्रायोजित किया गया है कि पंजाब में शांति रहे और वह विश्व को दिखा सके कि वह एक आतंक प्रभावित देश है।
पानी के मामले में कसूरी का यह बयान पंजाब की जनता को बहलाने के लिए दिया गया है जो इन गर्मियों के मौसम मैं पेयजल संकट का सामना कर रही है । अगर कहीं पंजाब की जनता नाखुश हो गयी तो पंजाब के शासक न घर के रहेंगे न घाटा के । जहां तक भारत का प्रश्न है तो इस समय भारत कि नदियों में ही पाने सूख जाता है तो उसके द्वारा पानी को रोकना का प्रश्न ही नही है। फिर भी भारत को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान की रणनीति खुराफाती दिमाग वाले लोग चलाते हैं जिनका असितत्व ही भारत विरोध पर निर्भर है।
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