Apr 17, 2007

दर्द का यहाँ होता है व्यापार

राजनीति वह व्यापार है
जिसमें गरीबी, बेकारी भ्रष्टाचार
और भुखमरी का दर्द बेचा जाता
दर्द
के इलाज का वादा
बिना दवा से किया जाता है
इलाज के नाम पर किये जाते
तरह तरह के समीकरण
मरीज हर बार फिर भी
इलाज कराने चला आता है
किस दर्द से कितना वोट जुडेंगे
इलाज के नाम पर कौनसे वर्ग जुटेंगे
जिनके पास दवा नहीं वही इलाज का
daavaa गला फाड़ कर करते है
जो करते हैं इलाज सच में
राजनीती का क्षेत्र
उन्हें रास नहीं आता है
----------------------
मैं अपनी कविता दर्द
बेचने के लिए नहीं लिखता
जो पीते हैं गम
उन पर अपने शब्द नही रचता
दर्द के कविताओं में भी
अपना दर्द नहीं भरता
हर निराशा पर आशा का चिराग
हर घात पर विश्वास की रोशनी
नाकामी पर नये संकल्प की रचना
करना मैंने सीखा है
दर्द से कविता पैदा होती है
पर मैंने दर्दों में घुटना नहीं
उनसे लड़ना सीखा है
बेदर्द कविता से ही दर्द को हराते
मेरा जीवन बीता है
---------------------------
अपने दर्द और गम ज़माने को
दिखाने से राहत नहीं मिलती
सब हँसते है एक दुसरे के
दर्द और को देख और सुनकर
इस दुनिया में किसी दर्द की
दवा नहीं मिलती
हंसने के लिए झूठे किस्से गडे जाते हैं
भला उनसे कहीं सच्ची हंसी कहीं मिलती है
अपने दर्द और ग़मों पर खुद हंसो
अकेले में सिंह की तरह दहाड़
मन को हल्का करना सीख लो
अपने दर्द की दवा मन में हे ही बनती
---------------------------
Post a Comment

आओ खूबसूरत चरित्रों की फिक्र करें-दीपकबापूवाणी (Aao Khubsurat charitron ki Fikra kahen-DeepakBapuwani)

जिससे डरे वही तन्हाई साथ चली , प्रेंमरहित मिली दिल की हर गली। ‘ दीपकबापू ’ हम तो चिंगारी लाते रहे अंधेरापसंदों को नह...