Apr 22, 2007

सौन्दर्य का बोध नज़रों से नहीं दिल से होता है

क्रीम और पाउडर से पुते चेहरे
सौंदर्य का बोध कराते
थोडा पसीना में ही नहाते
चेहरे की असलियत देखते ही
सौन्दर्य पारखी सहम जाते
चेहरे का ही सौन्दर्य अगर
वास्तविक सौन्दर्य होता तो
शिशु जब अपनी जननी को
देखकर गोदी में उठाने के लिए
अपने दोनों हाथ लहराता है
तब वह उसके रंग रुप की ओर नहीं
उसकी ममता में
सौन्दर्य का बोध कराता है
जब भाई अपनी बहिन की ओर
प्यार से निहारता है
तब उसके चेहरे में नहीं
उसके प्यार में सौंदर्य की
अनुभूति कराता है
जो ढूंढते है जिस्म में सौंदर्य
उन पर तरस आता है
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सौंदर्य देखने की नहीं
एक अनुभूति है
अगर अनुभूति नहीं कर सकते
तो देख नहीं सकोगे
और जिसे सुन्दर समझोगे
वह तुम्हारा भ्रम होगा
जब सच सामने आयेगा
तुम्हें अपने ठगे जाने का अहसास होगा
नजरों का प्यार होना
दिल मिलने का सबूत नहीं होता
अगर सौदर्य का बोध करना है तो
अपनी नीयत को सुन्दर करो
चारो ओर तुम्हें सौदर्य का
अहसास होगा
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